शादी का निमंत्रण पत्र कैसे लिखें: ढाँचा, संबोधन और 3 पूरे नमूने
24 अक्टूबर 2026 · 8 मिनट पढ़ें
शादी का निमंत्रण पत्र एक तय क्रम में लिखा जाता है: मंगलाचरण, निमंत्रक का निवेदन, वर-वधू का परिचय, कार्यक्रम, और अंत में दर्शनाभिलाषी व स्वागताकांक्षी। सही संबोधन, जैसे वर के लिए चि. और वधू के लिए सौ.कां., और नामों का सही क्रम ही पत्र को सम्मानजनक बनाता है।
निमंत्रण पत्र का ढाँचा
- मंगलाचरण: श्री गणेशाय नमः, कोई श्लोक या कुलदेवता का नाम।
- आमंत्रण की पंक्ति: सादर आमंत्रण, शुभ विवाह या मंगल परिणय।
- निमंत्रक का निवेदन: कौन बुला रहा है, जैसे हमारे सुपुत्र या हमारी सुपुत्री।
- वर-वधू का परिचय: नाम, माता-पिता का नाम और शहर।
- कार्यक्रम: हर कार्यक्रम की तारीख़, दिन, समय और स्थान।
- निवेदक: जिनके नाम से निमंत्रण जा रहा है।
- दर्शनाभिलाषी और स्वागताकांक्षी: परिवार और मित्रों के नाम।
- बाल आग्रह (वैकल्पिक): बच्चों की ओर से प्यारी विनती।
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किसका नाम कहाँ आता है
जिस पक्ष का कार्ड है, उसका बच्चा पहले लिखा जाता है। वधू पक्ष के कार्ड में पहले सौ.कां. वधू का नाम आता है, फिर चि. वर का नाम उसके माता-पिता और शहर के साथ। वर पक्ष के कार्ड में इसका उल्टा होता है। निवेदक में आमतौर पर माता-पिता या घर के सबसे बड़े सदस्य का नाम होता है।
- वर पक्ष का कार्ड: चि. [वर] संग सौ.कां. [वधू] (सुपुत्री श्रीमती एवं श्री ...)।
- वधू पक्ष का कार्ड: सौ.कां. [वधू] संग चि. [वर] (सुपुत्र श्रीमती एवं श्री ...)।
- दादा-दादी निवेदक हों तो लिखें: हमारी पौत्री या हमारे पौत्र, और कोष्ठक में माता-पिता का नाम।
- स्वर्गीय सदस्य का नाम लिखना हो तो नाम से पहले स्व. लिखें, जैसे स्व. श्री [नाम] की प्रेरणा से।
संबोधन और उनका सही इस्तेमाल
- श्री: पुरुषों के नाम से पहले, जैसे श्री रमेश चंद्र।
- श्रीमती: विवाहित महिलाओं के नाम से पहले। पति-पत्नी का नाम साथ लिखना हो तो श्रीमती एवं श्री [नाम] लिखा जाता है।
- सुपुत्र और सुपुत्री: माता-पिता के संदर्भ में, जैसे सुपुत्र श्रीमती सुनीता एवं श्री राजेश।
- चि. (चिरंजीव): अविवाहित वर के नाम से पहले, लंबी आयु के आशीर्वाद के भाव से।
- सौ.कां. (सौभाग्यकांक्षिणी): अविवाहित वधू के नाम से पहले, सौभाग्य की कामना के भाव से। कुछ क्षेत्रों में आयु. (आयुष्मती) भी लिखा जाता है।
- सौ. (सौभाग्यवती): विवाह के बाद, जैसे रिसेप्शन कार्ड में नववधू सौ. [नाम]।
- पौत्र, पौत्री, दौहित्र, दौहित्री: दादा-दादी के लिए पोता-पोती, नाना-नानी के लिए नाती-नातिन।
निमंत्रण पत्र लिखने में आम ग़लतियाँ
- विवाह के कार्ड में वधू के नाम से पहले सौ. लिख देना, जबकि विवाह से पहले सौ.कां. लिखा जाता है।
- वर के माता-पिता के नाम या शहर का छूट जाना।
- तारीख़ के साथ दिन न लिखना, या रात के फेरों में तारीख़ का भ्रम।
- दर्शनाभिलाषी में किसी क़रीबी रिश्तेदार का नाम छूट जाना, जिससे बाद में मन-मुटाव होता है।
- एक ही कार्ड में अलग-अलग संबोधन मिला देना, जैसे कहीं श्री तो कहीं Mr.।
- स्थान का अधूरा पता, बिना लैंडमार्क के।
नमूना 1: वधू पक्ष का पूरा निमंत्रण पत्र
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
शुभ विवाह
परमपिता परमात्मा की असीम अनुकम्पा से हमारी सुपुत्री
सौ.कां. [वधू का नाम]
का शुभ विवाह
चि. [वर का नाम]
(सुपुत्र श्रीमती [वर की माता] एवं श्री [वर के पिता], निवासी [शहर])
के साथ होना निश्चित हुआ है।
शुभ कार्यक्रम
हल्दी-मेहंदी: [तारीख़, दिन], प्रातः [समय]
बारात आगमन: [तारीख़, दिन], सायं [समय]
पाणिग्रहण संस्कार: रात्रि [समय]
विदाई: [तारीख़], प्रातः [समय]
स्थान: [पूरा पता, लैंडमार्क सहित]
आप सपरिवार पधारकर वर-वधू को आशीर्वाद प्रदान करें।
निवेदक
श्रीमती [माता का नाम] एवं श्री [पिता का नाम]
दर्शनाभिलाषी
[परिवार के नाम]
स्वागताकांक्षी
[रिश्तेदार एवं मित्र]नमूना 2: वर पक्ष का पूरा निमंत्रण पत्र
॥ ॐ श्री गणेशाय नमः ॥
मंगल परिणय
ईश्वर की कृपा एवं बड़ों के आशीर्वाद से हमारे सुपुत्र
चि. [वर का नाम]
का शुभ विवाह
सौ.कां. [वधू का नाम]
(सुपुत्री श्रीमती [वधू की माता] एवं श्री [वधू के पिता], निवासी [शहर])
के साथ होना तय हुआ है।
शुभ कार्यक्रम
तिलक: [तारीख़, दिन], सायं [समय]
हल्दी: [तारीख़], प्रातः [समय]
बारात प्रस्थान: [तारीख़], सायं [समय], निवास स्थान से
प्रीतिभोज: [तारीख़], सायं [समय]
आप सपरिवार इष्ट-मित्रों सहित पधारकर शोभा बढ़ाएँ।
निवेदक
श्रीमती [माता का नाम] एवं श्री [पिता का नाम]
दर्शनाभिलाषी
[परिवार के नाम]
बाल आग्रह
मेरे भैया की शादी में ज़रूर-ज़रूर आना।
[बच्चों के नाम]नमूना 3: दादा-दादी की ओर से संयुक्त परिवार का पत्र
॥ श्री गणेशाय नमः ॥
सादर आमंत्रण
स्व. श्री [परदादा का नाम] की पुण्य स्मृति एवं आशीर्वाद से
हमारी पौत्री
सौ.कां. [वधू का नाम]
(सुपुत्री श्रीमती [माता] एवं श्री [पिता])
का शुभ विवाह
चि. [वर का नाम]
(सुपुत्र श्रीमती [वर की माता] एवं श्री [वर के पिता], [शहर])
के साथ दिनांक [तारीख़, दिन] को सम्पन्न होगा।
स्थान: [पूरा पता]
इस मंगल अवसर पर आपकी उपस्थिति प्रार्थनीय है।
निवेदक
श्रीमती [दादी का नाम] एवं श्री [दादा का नाम]
दर्शनाभिलाषी
[ताऊ-ताई, चाचा-चाची, भाई-भाभी के नाम]इनमें से कोई भी नमूना NimantranKaro के डिजिटल कार्ड में लगाया जा सकता है। डिजिटल कार्ड में कार्यक्रमों की सूची अलग हिस्से में दिखती है, जिसमें हर स्थान का मैप और रास्ता होता है, इसलिए मुख्य पत्र छोटा भी रखा जा सकता है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
चि. और सौ.कां. का पूरा अर्थ क्या है?+
चि. का अर्थ चिरंजीव है, जो अविवाहित वर के नाम से पहले लंबी आयु के आशीर्वाद के भाव से लिखा जाता है। सौ.कां. का अर्थ सौभाग्यकांक्षिणी है, जो अविवाहित वधू के नाम से पहले लिखा जाता है।
निमंत्रण पत्र में निवेदक कौन होता है?+
निवेदक वह होता है जिसके नाम से निमंत्रण जा रहा है, आमतौर पर वर या वधू के माता-पिता। संयुक्त परिवारों में दादा-दादी या घर के सबसे बड़े सदस्य का नाम भी लिखा जाता है।
स्वर्गीय माता या पिता का नाम कैसे लिखें?+
नाम से पहले स्व. लिखें, जैसे सुपुत्री स्व. श्री [नाम] एवं श्रीमती [नाम]। कई परिवार ऊपर पुण्य स्मृति में या की प्रेरणा से जैसी पंक्ति भी लिखते हैं।
क्या निमंत्रण पत्र में सभी कार्यक्रम लिखना ज़रूरी है?+
जिन कार्यक्रमों में मेहमानों को बुला रहे हैं, उन्हें ज़रूर लिखें। डिजिटल कार्ड में अलग-अलग मेहमानों को अलग-अलग कार्यक्रमों की जानकारी देना भी आसान रहता है।
रिसेप्शन कार्ड में वधू के नाम से पहले क्या लिखें?+
विवाह के बाद के कार्यक्रम, जैसे प्रीतिभोज या रिसेप्शन में, वधू के नाम से पहले सौ. (सौभाग्यवती) लिखा जाता है।

