मुस्लिम शादी कार्ड मैटर — निकाह, वलीमा और मेहंदी के लिए हिंदी व उर्दू वर्डिंग
24 अक्टूबर 2026 · 8 मिनट पढ़ें
मुस्लिम शादी कार्ड का मैटर आम तौर पर बिस्मिल्लाह या किसी दुआइया जुमले से शुरू होता है, फिर दावत देने वाले बुज़ुर्ग का नाम, दूल्हा-दुल्हन के नाम वल्दियत के साथ, और निकाह, वलीमा या मेहंदी की तारीख़, वक़्त और जगह लिखी जाती है। नीचे हिंदी लिपि और रोमन उर्दू में तैयार नमूने हैं, जिन्हें आप अपने ख़ानदान के रिवाज के मुताबिक़ बदल सकते हैं।
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली-एनसीआर के बहुत से घरों में कार्ड की ज़बान हिंदी-उर्दू की मिली-जुली होती है। कुछ घर उर्दू लिपि में कार्ड छपवाते हैं, तो कुछ हिंदी लिपि या रोमन में ताकि हर मेहमान आसानी से पढ़ सके। इस लेख में हमने देवनागरी और रोमन, दोनों रूप दिए हैं।
निकाह कार्ड मैटर लिखने का आम क्रम
- सबसे ऊपर: बिस्मिल्लाह या कोई छोटा दुआइया जुमला (ख़ानदान की पसंद के मुताबिक़)।
- दावत देने वाले: वालिद/वालिदा या घर के बुज़ुर्ग का नाम और पता।
- दावत का जुमला: जैसे 'आपकी शिरकत हमारे लिए बाइस-ए-मसर्रत होगी'।
- दूल्हा: नाम, वल्दियत (फ़लाँ साहब के साहबज़ादे)।
- दुल्हन: नाम, वल्दियत (फ़लाँ साहब की साहबज़ादी)।
- प्रोग्राम: निकाह, वलीमा, मेहंदी — तारीख़, दिन, वक़्त और मक़ाम।
- आख़िर में: मुन्तज़िर/ख़ैर-अंदेश/दुआगो के नाम और राब्ते का नंबर।
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बिस्मिल्लाह और इंशा अल्लाह — लिखने के आम तरीक़े
बहुत से परिवार कार्ड की पहली पंक्ति में बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम लिखते हैं, कुछ अरबी लिपि में और कुछ उसका अनुवाद, जैसे 'अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है'। कुछ परिवार इसकी जगह 786 या कोई छोटा दुआइया जुमला रखते हैं। यह पूरी तरह आपके ख़ानदान के रिवाज और आपके आलिम या बुज़ुर्गों की राय पर है; हम यहाँ सिर्फ़ प्रचलित तरीक़े बता रहे हैं, कोई मज़हबी फ़ैसला नहीं।
- अगर कार्ड छपवा रहे हैं, तो बहुत से लोग अदब की वजह से चाहते हैं कि कार्ड इधर-उधर न फेंका जाए; डिजिटल कार्ड में यह फ़िक्र कम हो जाती है।
- 'इंशा अल्लाह' आम तौर पर आने वाली तारीख़ के साथ लिखा जाता है, जैसे 'इंशा अल्लाह 12 दिसंबर को निकाह होगा'।
- 'माशा अल्लाह' या 'अल्हम्दुलिल्लाह' जैसे जुमले भी कई कार्ड में ख़ुशी ज़ाहिर करने के लिए आते हैं।
- अरबी इबारत लिख रहे हैं तो उसकी स्पेलिंग किसी जानकार से एक बार ज़रूर जँचवा लें।
निकाह कार्ड मैटर — हिंदी लिपि में
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
बफ़ज़्ल-ए-ख़ुदा हमारे साहबज़ादे
मोहम्मद आसिफ़ (वल्द जनाब अब्दुल रशीद साहब)
का निकाह
आयशा परवीन (बिन्त जनाब शकील अहमद साहब)
के साथ इंशा अल्लाह तय पाया है।
तारीख़: रविवार, 13 दिसंबर
वक़्त: बाद नमाज़-ए-ज़ुहर
मक़ाम: [जगह का नाम और पता]
आपकी शिरकत हमारे लिए बाइस-ए-मसर्रत होगी।
मुन्तज़िर: अब्दुल रशीद व अहल-ए-ख़ानाअल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है
हमारी बेटी
सना फ़ातिमा
का निकाह
जनाब इमरान ख़ान (वल्द जनाब सलीम ख़ान साहब)
के साथ इंशा अल्लाह होना तय पाया है।
इस मुबारक मौक़े पर आप अपने अहल-ए-ख़ाना के साथ तशरीफ़ लाकर दुआओं से नवाज़ें।
तारीख़: [तारीख़]
मक़ाम: [पता]
दुआगो: जनाब अनवर हुसैन व बेगमबिस्मिल्लाह
इंशा अल्लाह हमारे घर ख़ुशियों का दिन आ रहा है।
फ़ैज़ान और ज़ोया का निकाह [तारीख़] को [जगह] पर होगा।
आपकी मौजूदगी और दुआएँ हमारे लिए सबसे बड़ा तोहफ़ा होंगी।बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
मैं अपने पोते
अरशद अली
के निकाह की तक़रीब में आपको तहे दिल से मदऊ करता हूँ।
दुल्हन: नाज़िया बानो (बिन्त जनाब रफ़ीक़ साहब)
तारीख़ व वक़्त: [भरें]
मक़ाम: [भरें]
दुआओं का तालिब: हाजी नसीम अलीनिकाह कार्ड मैटर — रोमन उर्दू (Hinglish) में
Bismillahir Rahmanir Raheem
Ba-fazl-e-Khuda hamare sahabzade
Mohammad Asif (s/o Janab Abdul Rasheed Sahab)
ka Nikah
Ayesha Parveen (d/o Janab Shakeel Ahmad Sahab)
ke saath Insha Allah tay paya hai.
Tareekh: Ravivar, 13 December
Waqt: Baad Namaz-e-Zuhr
Maqaam: [Venue address]
Aapki shirkat hamare liye baais-e-masarrat hogi.
Muntazir: Abdul Rasheed wa Ahl-e-KhanaAllah ke naam se jo bada meherban, nihayat reham wala hai
Hamari beti Sana Fatima ka Nikah
Janab Imran Khan (s/o Janab Saleem Khan Sahab) ke saath
Insha Allah [tareekh] ko hona tay paya hai.
Aap apne ahl-e-khana ke saath tashreef laakar duaon se nawazein.
Duago: Janab Anwar Hussain wa BegumAssalamu Alaikum!
Insha Allah Faizan aur Zoya ka Nikah [tareekh] ko [jagah] par hai.
Aapki maujoodgi aur duaein hamare liye sabse bada tohfa hongi.
Card ka link: [link]वलीमा कार्ड मैटर
वलीमा की दावत आम तौर पर दूल्हे के घर वालों की तरफ़ से निकाह के बाद दी जाती है। कार्ड में साफ़ लिखें कि यह दावत-ए-वलीमा है, ताकि मेहमान समझ सकें कि यह खाने की तक़रीब है।
बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
अल्हम्दुलिल्लाह, हमारे साहबज़ादे मोहम्मद आसिफ़ का निकाह आयशा परवीन के साथ बख़ैर-ओ-ख़ूबी हो गया।
इस ख़ुशी में दावत-ए-वलीमा रखी गई है।
तारीख़: [तारीख़]
वक़्त: शाम 7 बजे से
मक़ाम: [पता]
आपकी तशरीफ़आवरी हमारी ख़ुशी को दोबाला करेगी।
मुन्तज़िर: अब्दुल रशीद व अहल-ए-ख़ानाAlhamdulillah!
Hamare sahabzade Mohammad Asif ka Nikah Ayesha Parveen ke saath ba-khair-o-khoobi ho gaya.
Is khushi mein Dawat-e-Walima rakhi gayi hai.
Tareekh: [date] | Waqt: Shaam 7 baje se
Maqaam: [venue]
Aapki tashreef-aawari hamari khushi ko dobala karegi.अल्हम्दुलिल्लाह! निकाह के बाद दावत-ए-वलीमा [तारीख़] शाम [वक़्त] [जगह] पर है।
आप सब ख़ानदान के साथ ज़रूर तशरीफ़ लाएँ।मेहंदी / रस्म-ए-हिना कार्ड मैटर
माशा अल्लाह!
हमारी बेटी सना की रस्म-ए-हिना (मेहंदी) की महफ़िल में
आप सादर मदऊ हैं।
तारीख़: [तारीख़] | वक़्त: शाम 6 बजे
मक़ाम: [घर का पता]
गीतों, मेहंदी और मुस्कुराहटों से भरी इस शाम में आपका इंतज़ार रहेगा।Masha Allah!
Sana ki Rasm-e-Hina ki mehfil mein aap sab mad'oo hain.
Tareekh: [date] | Waqt: Shaam 6 baje
Maqaam: [address]
Geet, mehndi aur muskurahaton ki is shaam mein aapka intezaar rahega.Zoya ki mehndi hai aur aapke bina rang adhoora rahega!
[Tareekh], shaam [waqt], [jagah].
Insha Allah milte hain!उर्दू लफ़्ज़ों के मायने — ताकि सही जगह इस्तेमाल हों
- मदऊ — जिसे दावत दी गई हो, आमंत्रित।
- शिरकत — शामिल होना।
- बाइस-ए-मसर्रत — ख़ुशी की वजह।
- मुन्तज़िर — इंतज़ार करने वाले, यानी स्वागत करने वाले।
- दुआगो — दुआ देने वाले बुज़ुर्ग।
- तशरीफ़आवरी — पधारना।
- वल्द / बिन्त — फ़लाँ का बेटा / फ़लाँ की बेटी।
- अहल-ए-ख़ाना — घर-परिवार के लोग।
डिजिटल निकाह कार्ड में क्या-क्या जोड़ सकते हैं
NimantranKaro पर आप ऊपर का कोई भी मैटर डालकर वेबसाइट जैसा कार्ड बना सकते हैं। निकाह, वलीमा और मेहंदी — तीनों प्रोग्राम एक ही कार्ड में अलग-अलग तारीख़ और जगह के साथ दिख सकते हैं। हर मेहमान के लिए अलग लिंक बनता है जिसमें उनका नाम लिखकर इस्तक़बाल होता है।
- Google Map पर मक़ाम और रास्ता, ताकि बाहर से आने वालों को दिक़्क़त न हो।
- RSVP — कौन आ रहा है और कितने लोग, CSV में डाउनलोड।
- हिंदी, Hinglish और English के बीच बदलने का विकल्प।
- छपे कार्ड के लिए QR कोड, जिसे स्कैन करके बुज़ुर्ग भी लोकेशन देख सकें।
- भेजने के बाद भी कार्ड में बदलाव, नया लिंक भेजने की ज़रूरत नहीं।
- कार्ड Google सर्च में नहीं दिखता, सिर्फ़ लिंक वालों तक रहता है।
शुरुआत में मुफ़्त प्रीव्यू मिलता है (वॉटरमार्क के साथ, 3 दिन के लिए), ताकि आप घर वालों को दिखाकर मैटर पक्का कर सकें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
क्या निकाह कार्ड पर बिस्मिल्लाह लिखना ज़रूरी है?+
यह ख़ानदान के रिवाज पर है। बहुत से परिवार लिखते हैं, कुछ 786 या कोई दुआइया जुमला रखते हैं। अपने बुज़ुर्गों या आलिम से राय लेना बेहतर है।
Nikah card matter Hindi में लिखें या उर्दू में?+
जिस लिपि को आपके ज़्यादातर मेहमान आराम से पढ़ते हैं, वही चुनें। डिजिटल कार्ड में आप हिंदी और रोमन (Hinglish) दोनों रख सकते हैं, मेहमान ख़ुद भाषा बदल सकते हैं।
वलीमा का कार्ड अलग बनाना चाहिए?+
ज़रूरी नहीं। एक ही कार्ड में निकाह और वलीमा दोनों प्रोग्राम अलग तारीख़ और जगह के साथ दिखाए जा सकते हैं। अगर वलीमा की मेहमान-सूची अलग है, तो अलग कार्ड बेहतर रहता है।
दूल्हा-दुल्हन के नाम के साथ वल्दियत कैसे लिखें?+
आम तरीक़ा है: नाम (वल्द जनाब ... साहब) दूल्हे के लिए और नाम (बिन्त जनाब ... साहब) दुल्हन के लिए। रोमन में s/o और d/o भी लिखा जाता है।
क्या डिजिटल कार्ड सबको दिखेगा?+
NimantranKaro के कार्ड Google सर्च से छिपे रहते हैं। जिन्हें आप लिंक भेजते हैं, वही उसे खोल सकते हैं।

